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जन्म कुंडली में अष्टम का यदि चंद्रमा हो, तो ऐसा चंद्रमा भयंकर मानसिक कष्ट और परेशानी देने
जन्म कुंडली में अष्टम का यदि चंद्रमा हो, तो ऐसा चंद्रमा भयंकर मानसिक कष्ट और परेशानी देने वाला होता है। बल्कि यह यदि छिड़ चंद्रमा हो, तो बाल्य काल से ही जातक को रोगी बना देता हैं। परंतु यदि पक्ष बल से बली हो,तो ऐसे जातक दिल के बहुत अच्छे होते हैं। ऐसा जातक यदि ज्योतिषी बन जाए, तो उसकी भविष्यवाणी सदैव ही सत्य सिद्ध होगी। ऐसा जातक गरीब बच्चों की मदद करें।तो उसे विशेष लाभ होगा।
Pawan Dubey
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जन्म कुंडली में कोई नीच का ग्रह लग्न में हो,और शनि की दृष्टि उस ग्रह पर हो, अथवा लग्न में शनि
जन्म कुंडली में कोई नीच का ग्रह लग्न में हो,और शनि की दृष्टि उस ग्रह पर हो, अथवा लग्न में शनि और राहु की युति हो, अथवा नवमांश कुंडली में शुक्र और मंगल की युति हो, अथवा लग्नेश केंद्र में राहु के साथ हों,तो ऐसे जातक के जीवन काल में कलंक लगने की स्थिति अवश्य बनती है। ऐसा जातक साथ शनिवार को काला नमक दान करें। इससे लाभ होगा। और जो भी कलंक की स्थिति बनती है। इससे जातक को मुक्ति मिलेगी।
Pawan Dubey
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जन्म कुंडली में शनि यदि दशम भाव के स्वामी के साथ हों, अथवा दशम भाव का स्वामी राहु
जन्म कुंडली में शनि यदि दशम भाव के स्वामी के साथ हों, अथवा दशम भाव का स्वामी राहु अथवा केतु के साथ हो, अथवा दशम भाव का स्वामी, देवगुरु बृहस्पति के साथ हो, अथवा नवम भाव और पंचम भाव के स्वामी, एक साथ कुंडली में कहीं भी युति में बैठे हो, तो ऐसे जातक को अपने जीवन काल में, अपने सामर्थ्य के अनुसार यज्ञ अनुष्ठान विशेष करके हवन आदि के कार्य करते रहना चाहिए। इससे जातक का जीवन, आजीवन सुखी रहता है। जातक आजीवन सफल रहता है।
Pawan Dubey
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जन्म कुंडली में बलवान लाभेश जिस भाव में होगा, उस भाव को मूल्यवान कर देगा।
जन्म कुंडली में बलवान लाभेश जिस भाव में होगा, उस भाव को मूल्यवान कर देगा। परंतु उस भाव से संबंधित रिश्ते को रोगी भी करेगा। क्योंकि छठे से छठा होने के कारण, लाभ भाव भी रोग को प्रदर्शित करता है। अब एक उदाहरण देखिए,कि बलवान लाभेश यदि जन्म कुंडली के चतुर्थ भाव में हो, तो ऐसे जातक की माता संभवत: नौकरी करने वाली हो। या किसी और प्रकार से धनवान हो। धन उनके पास हो। परंतु ऐसे लाभ भाव के स्वामी पर, किसी पाप ग्रह की दृष्टि हो,तो जातक की माता रोगी रहेगी। और उनका ज्यादातर पैसा अपने स्वास्थ
Pawan Dubey
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जन्म कुंडली के नवम भाव पर यदि शुभ ग्रह अथवा पाप ग्रह किसी की भी दृष्टि ना हो,
जन्म कुंडली के नवम भाव पर यदि शुभ ग्रह अथवा पाप ग्रह किसी की भी दृष्टि ना हो, और ना ही कोई ग्रह नवम भाव में हो,तो समझ लीजिए। ऐसे जातक का भाग्य उसका साथ नहीं देता। चाहे नवम भाव का स्वामी कितना ही बली क्यों ना हो। ऐसी अवस्था में जातक को लगातार संघर्ष के बाद भी वह उचित सफलता नहीं मिल पाती। जो औरों को आसानी से मिल जाती है। जन्म कुंडली में ऐसी स्थिति होने पर पहले काम तो यह करिए कि अपने देवगुरु बृहस्पति को बली करिए। और दूसरा गुरु दीक्षा लेकर गुरु प्रदत्त मंत्र का जप नित्य नियम से क
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बच्चें की जन्म कुंडली में चंद्रमा चतुर्थ भाव, षष्ठ भाव में अथवा अष्टम भाव में हों, अथवा चंद्रमा की
बच्चें की जन्म कुंडली में चंद्रमा चतुर्थ भाव, षष्ठ भाव में अथवा अष्टम भाव में हों, अथवा चंद्रमा की दशा हो, ऐसे बालक को, नवजात शिशु को, कफ् जन्य रोग अवश्य होता है। ऐसे बच्चे सामान्य मौसम परिवर्तन से भी प्रभावित हो जाते हैं। यदि आपके घर में ऐसा बच्चा है,तो आपको अवश्य ही सावधान रहना चाहिए। ऐसे बच्चों की माता को पूर्णिमा का व्रत करना चाहिए। और यदि जन्म कुंडली में चंद्रमा छठे भाव और आठवें भाव के स्वामी हैं। तब उनकी दशा चल रही है। और बालक की उम्र 8 वर्ष के भीतर है। तो यह विशेष मारक
Pawan Dubey
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जन्म कुंडली में वक्री, स्वगृही अथवा उच्च के शुभ ग्रह के साथ पाप ग्रह, अथवा वक्री, स्वगृही
जन्म कुंडली में वक्री, स्वगृही अथवा उच्च के शुभ ग्रह के साथ पाप ग्रह, अथवा वक्री, स्वगृही अथवा उच्च के पाप ग्रह के साथ शुभ ग्रह की युति हो, इस युति को अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में इसे बेहद श्रेष्ठ, धन-धान्य से परिपूर्ण करने वाला, राजा अथवा राजा के समतुल्य बना देने वाला राजयोग माना गया है।
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जन्म कुंडली में कोई भी ग्रह उच्च का हो अथवा स्वगृही हो, और साथ ही साथ वर्गोत्तमी हो,
जन्म कुंडली में कोई भी ग्रह उच्च का हो अथवा स्वगृही हो, और साथ ही साथ वर्गोत्तमी हो, वर्गोत्तमी कैसे अर्थात् जन्मांक कुंडली में स्वगृही हों,तो नवमांश कुंडली में भी ठीक उसी राशि में हो, जन्मांक में उच्च का है, तो ठीक उसी राशि में नवमांश का भी उच्च का हो, इस स्थिति को भी ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। यह अकेला ग्रह जातक को उसके जीवन काल में संपूर्ण सुख प्रदान करने वाला माना गया हैं। ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ कहते हैं,कि ऐसा जातक एक वर्गोत्तमी ग्रह के होने भर म
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जन्म कुंडली के लग्न में शनि और मंगल की युति हो, नवम भाव या दशम भाव में
जन्म कुंडली के लग्न में शनि और मंगल की युति हो, नवम भाव या दशम भाव में देवगुरु बृहस्पति हों, और सूर्य जन्म कुंडली के नवम भाव, दशम भाव या एकादश भाव में से किसी भाव में हों, तो ऐसा जातक कुबेर के समान धनवान, धार्मिक बुद्धि से युक्त, और ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ कहते हैं, कि ऐसा जातक परमपिता का कृपा पात्र होता है। हालांकि लग्न गत शनि और मंगल की युति से, जातक थोड़ा झक्की प्रवृत्ति का होता है। स्वभाव उसका गुसैल,और बात-बात पर क्रोध करने वाला, यह अलग उसके स्वभाव की एक विसंगति या उसक
Pawan Dubey
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जन्म कुंडली में शनि देव द्वितीय भाव में हों, चतुर्थ में हों, नवम, दशम अथवा
जन्म कुंडली में शनि देव द्वितीय भाव में हों, चतुर्थ में हों, नवम, दशम अथवा एकादश भाव में हों, और ऐसे शनिदेव पर यदि देवगुरु बृहस्पति की दृष्टि हो। ऐसा संयोग जातक को सभी प्रकार के सुख को देने वाला,धन-धान्य से परिपूर्ण बना देता है। अब यह अलग बात है, कि द्वितीय और चतुर्थ भाव में शनि देव हों, एकादश एकादश और दशम भाव में यदि शनि देव हों, तो एकादश और दशम के शनि देव कार्यों को विलंबित करने वाले, द्वितीय और चतुर्थ के शनि देव के होने से, द्वितीय के शनिदेव थोड़ा झूठ बोलने की प्रवृत्ति ज
Pawan Dubey
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जन्म कुंडली में शनि या राहु, कुंडली के तीसरे अथवा छठे स्थान पर हों,तो ऐसे जातक
जन्म कुंडली में शनि या राहु, कुंडली के तीसरे अथवा छठे स्थान पर हों,तो ऐसे जातक को भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पूर्वाभास होने लगता है।...
Pawan Dubey
Apr 16, 20251 min read
जन्म कुंडली में केंद्र और त्रिकोण में पाप ग्रह ना हों, लग्नेश और देवगुरु बृहस्पति केंद्र में स्थित
जन्म कुंडली में केंद्र और त्रिकोण में पाप ग्रह ना हों, लग्नेश और देवगुरु बृहस्पति केंद्र में स्थित हों, जरूरी नहीं है, कि युति में...
Pawan Dubey
Apr 16, 20251 min read
जन्म कुंडली में द्वितीय भाव का स्वामी बलवान हो, शुभ ग्रह से युत, अपनी स्वराशि या उच्च
जन्म कुंडली में द्वितीय भाव का स्वामी बलवान हो, शुभ ग्रह से युत, अपनी स्वराशि या उच्च राशि में हो, साथ ही साथ जन्म कुंडली में देवगुरु...
Pawan Dubey
Apr 16, 20251 min read
लाभ भाव का स्वामी, भाग्य भाव में, धान भाव का स्वामी लाभ भाव में, और भाग्येश धन भाव में,
लाभ भाव का स्वामी, भाग्य भाव में, धन भाव का स्वामी लाभ भाव में, और भाग्येश धन भाव में, कर्म भाव के स्वामी से युत,या दृष्ट होकर बैठे हों,...
Pawan Dubey
Apr 16, 20251 min read
जन्म कुंडली में मंगल यदि चतुर्थ भाव में, सप्तम भाव में और दशम भाव में हैं। तो एक मूल मंत्र
जन्म कुंडली में मंगल यदि चतुर्थ भाव में, सप्तम भाव में और दशम भाव में हैं। तो एक मूल मंत्र बता दे रहा हूं,आजीवन याद रखिए। किसी की मदद मत...
Pawan Dubey
Apr 16, 20251 min read
जन्म कुंडली में लग्न भाव का स्वामी और सुख भाव का स्वामी बलवान होकर करके केंद्र
जन्म कुंडली में लग्न भाव का स्वामी और सुख भाव का स्वामी बलवान होकर करके केंद्र अथवा त्रिकोण अर्थात् केंद्र का अर्थ 1,4,7,10 और त्रिकोण...
Pawan Dubey
Apr 16, 20251 min read
जन्म कुंडली में सूर्य और शनि दोनों नीच के हो, ऐसी स्थिति में यह दोनों ग्रह आमने-सामने होंगे।
जन्म कुंडली में सूर्य और शनि दोनों नीच के हो, ऐसी स्थिति में यह दोनों ग्रह आमने-सामने होंगे। ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ कहते हैं, कि ऐसा...
Pawan Dubey
Apr 16, 20251 min read
जन्म कुंडली में देवगुरु बृहस्पति अथवा पंचम भाव का स्वामी केंद्र अथवा त्रिकोण में,स्थित हो
जन्म कुंडली में देवगुरु बृहस्पति अथवा पंचम भाव का स्वामी केंद्र अथवा त्रिकोण में,स्थित हो और शुभ ग्रह से दृष्ट हो,तो ऐसे जातक को भविष्य...
Pawan Dubey
Apr 16, 20251 min read
जन्म कुंडली में केंद्र में अर्थात् लग्न, चतुर्थ, सप्तम, और दशम गुरु और शुक्र
जन्म कुंडली में केंद्र में अर्थात् लग्न, चतुर्थ, सप्तम, और दशम गुरु और शुक्र इन चारों में से किसी एक भाव में भी गुरु या शुक्र इन चारों...
Pawan Dubey
Apr 16, 20251 min read
जन्म कुंडली में पाप ग्रह से युत अथवा दृष्ट मंगल,
जन्म कुंडली में पाप ग्रह से युत अथवा दृष्ट मंगल,यदि कुंडली के सप्तम भाव में हो, तो जातक दंत रोगी, मूत्र रोग से ग्रसित एवं नपुंसकता का...
Pawan Dubey
Apr 16, 20251 min read
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