जन्म कुंडली में शनि या राहु, कुंडली के तीसरे अथवा छठे स्थान पर हों,तो ऐसे जातक
जन्म कुंडली में शनि या राहु, कुंडली के तीसरे अथवा छठे स्थान पर हों,तो ऐसे जातक को भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पूर्वाभास होने लगता है। ऐसा जातक सदैव अपनी इस्ट की आराधना करें। और उसके मन में जो भी उत्पन्न हो रहा हो। जो भी उसको पूर्वाभास हो रहा हो। उसका ढिंढोरा ना पीटे। नहीं तो उसकी यह शक्ति लुप्त हो जाएगी।

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