जन्म कुंडली में पाप ग्रह से युत अथवा दृष्ट मंगल,यदि कुंडली के सप्तम भाव में हो, तो जातक दंत रोगी, मूत्र रोग से ग्रसित एवं नपुंसकता का शिकार हो जाता है।
जन्म कुंडली में अष्टम का यदि चंद्रमा हो, तो ऐसा चंद्रमा भयंकर मानसिक कष्ट और परेशानी देने वाला होता है। बल्कि यह यदि छिड़ चंद्रमा हो, तो बाल्य काल से ही जातक को रोगी बना देता हैं। परंतु यदि पक्ष बल से
जन्म कुंडली में कोई नीच का ग्रह लग्न में हो,और शनि की दृष्टि उस ग्रह पर हो, अथवा लग्न में शनि और राहु की युति हो, अथवा नवमांश कुंडली में शुक्र और मंगल की युति हो, अथवा लग्नेश केंद्र में राहु के साथ हो
जन्म कुंडली में शनि यदि दशम भाव के स्वामी के साथ हों, अथवा दशम भाव का स्वामी राहु अथवा केतु के साथ हो, अथवा दशम भाव का स्वामी, देवगुरु बृहस्पति के साथ हो, अथवा नवम भाव और पंचम भाव के स्वामी, एक साथ कु
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