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दरिद्रता से मनुष्य लज्जित हो जाता है।

  • Pawan Dubey
  • Jan 23, 2023
  • 1 min read

दरिद्रता से मनुष्य लज्जित हो जाता है। और लज्जित मनुष्य निस्तेज हो जाता है,और तेज हीन हो जाने के कारण उसका तुरंत निरादर होगा,और जैसे ही वह ज्ञानवान व्यक्ति अपना निरादर देखेगा,वह खिन्न हो जाएगा,क्योंकि मेरे पास इतना ज्ञान है,काश मेरे पास धन भी होता,और यह काश जैसे ही उसके मन में उत्पन्न होगा,वह खिन्न हो जाएगा,और खिन्न मनुष्य शोकाकुल हो जाता है,शोक किस बात का होगा,कि मेरे पास ज्ञान तो है,लेकिन धन नहीं है,और शोकाकुल मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है,और बुद्धि नष्ट हो गया ज्ञानवान का और उसका जीवन ही ज्ञान है।और जैसे ही उसकी बुद्धि नष्ट हुई समझ लीजिए,तक्षण उसकी मृत्यु हो गई,अहो यह कैसा आश्चर्य है,एक दरिद्रता सभी आपदाओं का एक मात्र स्थान है,यानी समस्याएं चाहिए आपदा चाहिए,तो कहीं और नहीं जाना तो केवल एक दरिद्रता को चुन लीजिए,हर आपदा इस दरिद्रता के पास है।

 
 
 

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