top of page

बच्चें की जन्म कुंडली में चंद्रमा चतुर्थ भाव, षष्ठ भाव में अथवा अष्टम भाव में हों, अथवा चंद्रमा की

Pawan Dubey
Jul 13
1 min read

बच्चें की जन्म कुंडली में चंद्रमा चतुर्थ भाव, षष्ठ भाव में अथवा अष्टम भाव में हों, अथवा चंद्रमा की दशा हो, ऐसे बालक को, नवजात शिशु को, कफ् जन्य रोग अवश्य होता है। ऐसे बच्चे सामान्य मौसम परिवर्तन से भी प्रभावित हो जाते हैं। यदि आपके घर में ऐसा बच्चा है,तो आपको अवश्य ही सावधान रहना चाहिए। ऐसे बच्चों की माता को पूर्णिमा का व्रत करना चाहिए। और यदि जन्म कुंडली में चंद्रमा छठे भाव और आठवें भाव के स्वामी हैं। तब उनकी दशा चल रही है। और बालक की उम्र 8 वर्ष के भीतर है। तो यह विशेष मारक सिद्ध होगा। और ऐसी अवस्था अगर आपके घर में किसी बच्चें की है। तो फिर ऐसे घर के बच्चे के जो माता-पिता हैं। अवश्य ही शिवजी की आराधना करें। महामृत्युंजय का जप करें। यह बच्चे के हित में होगा। उसकी आयु की सुरक्षा इससे होगी।

 
 
 

Recent Posts

See All
जन्म कुंडली में अष्टम का यदि चंद्रमा हो, तो ऐसा चंद्रमा भयंकर मानसिक कष्ट और परेशानी देने

जन्म कुंडली में अष्टम का यदि चंद्रमा हो, तो ऐसा चंद्रमा भयंकर मानसिक कष्ट और परेशानी देने वाला होता है। बल्कि यह यदि छिड़ चंद्रमा हो, तो बाल्य काल से ही जातक को रोगी बना देता हैं। परंतु यदि पक्ष बल से

 
 
 
जन्म कुंडली में कोई नीच का ग्रह लग्न में हो,और शनि की दृष्टि उस ग्रह पर हो, अथवा लग्न में शनि

जन्म कुंडली में कोई नीच का ग्रह लग्न में हो,और शनि की दृष्टि उस ग्रह पर हो, अथवा लग्न में शनि और राहु की युति हो, अथवा नवमांश कुंडली में शुक्र और मंगल की युति हो, अथवा लग्नेश केंद्र में राहु के साथ हो

 
 
 
जन्म कुंडली में शनि यदि दशम भाव के स्वामी के साथ हों, अथवा दशम भाव का स्वामी राहु

जन्म कुंडली में शनि यदि दशम भाव के स्वामी के साथ हों, अथवा दशम भाव का स्वामी राहु अथवा केतु के साथ हो, अथवा दशम भाव का स्वामी, देवगुरु बृहस्पति के साथ हो, अथवा नवम भाव और पंचम भाव के स्वामी, एक साथ कु

 
 
 

Comments


bottom of page