जन्म कुंडली में शनि यदि दशम भाव के स्वामी के साथ हों, अथवा दशम भाव का स्वामी राहु
जन्म कुंडली में शनि यदि दशम भाव के स्वामी के साथ हों, अथवा दशम भाव का स्वामी राहु अथवा केतु के साथ हो, अथवा दशम भाव का स्वामी, देवगुरु बृहस्पति के साथ हो, अथवा नवम भाव और पंचम भाव के स्वामी, एक साथ कुंडली में कहीं भी युति में बैठे हो, तो ऐसे जातक को अपने जीवन काल में, अपने सामर्थ्य के अनुसार यज्ञ अनुष्ठान विशेष करके हवन आदि के कार्य करते रहना चाहिए। इससे जातक का जीवन, आजीवन सुखी रहता है। जातक आजीवन सफल रहता है।

Comments