जन्म कुंडली में बलवान लाभेश जिस भाव में होगा, उस भाव को मूल्यवान कर देगा।
जन्म कुंडली में बलवान लाभेश जिस भाव में होगा, उस भाव को मूल्यवान कर देगा। परंतु उस भाव से संबंधित रिश्ते को रोगी भी करेगा। क्योंकि छठे से छठा होने के कारण, लाभ भाव भी रोग को प्रदर्शित करता है।
अब एक उदाहरण देखिए,कि बलवान लाभेश यदि जन्म कुंडली के चतुर्थ भाव में हो, तो ऐसे जातक की माता संभवत: नौकरी करने वाली हो। या किसी और प्रकार से धनवान हो। धन उनके पास हो। परंतु ऐसे लाभ भाव के स्वामी पर, किसी पाप ग्रह की दृष्टि हो,तो जातक की माता रोगी रहेगी। और उनका ज्यादातर पैसा अपने स्वास्थ्य में ही चला जाएगा। परंतु वही किसी शुभ ग्रह की दृष्टि चतुर्थ भावगत लाभेश पर दृष्टि हो, तो जातक की माता धनवान होगी। और जातक को माता से विशेष लाभ होगा।

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