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जन्म कुंडली में कोई भी ग्रह उच्च का हो अथवा स्वगृही हो, और साथ ही साथ वर्गोत्तमी हो,

Pawan Dubey
Jul 13
1 min read

जन्म कुंडली में कोई भी ग्रह उच्च का हो अथवा स्वगृही हो, और साथ ही साथ वर्गोत्तमी हो, वर्गोत्तमी कैसे अर्थात् जन्मांक कुंडली में स्वगृही हों,तो नवमांश कुंडली में भी ठीक उसी राशि में हो, जन्मांक में उच्च का है, तो ठीक उसी राशि में नवमांश का भी उच्च का हो, इस स्थिति को भी ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। यह अकेला ग्रह जातक को उसके जीवन काल में संपूर्ण सुख प्रदान करने वाला माना गया हैं। ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ कहते हैं,कि ऐसा जातक एक वर्गोत्तमी ग्रह के होने भर मात्र से, जीवन का संपूर्ण सुख प्राप्त करता है। राजा अथवा राजा के समतुल्य होता है।

 
 
 

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