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जन्म कुंडली के लग्न में शनि और मंगल की युति हो, नवम भाव या दशम भाव में

Pawan Dubey
Jul 13
1 min read

जन्म कुंडली के लग्न में शनि और मंगल की युति हो, नवम भाव या दशम भाव में देवगुरु बृहस्पति हों, और सूर्य जन्म कुंडली के नवम भाव, दशम भाव या एकादश भाव में से किसी भाव में हों, तो ऐसा जातक कुबेर के समान धनवान, धार्मिक बुद्धि से युक्त, और ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ कहते हैं, कि ऐसा जातक परमपिता का कृपा पात्र होता है।

हालांकि लग्न गत शनि और मंगल की युति से, जातक थोड़ा झक्की प्रवृत्ति का होता है। स्वभाव उसका गुसैल,और बात-बात पर क्रोध करने वाला, यह अलग उसके स्वभाव की एक विसंगति या उसका एक दुर्गुण आप कह लीजिए। लेकिन धन-धान्य से पूर्ण और ऐसा जातक परमपिता का कृपा पात्र होता है।

 
 
 

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